Vishnu Chalisa

Thursday, April 16, 2026

॥ श्री विष्णु चालीसा ॥

दोहा
श्री गणपति गुरु गौरी पद, बंदि करौं प्रणाम।
विष्णु कृपा से मिटे, सब संकट के धाम॥

चौपाई

जय जय श्री विष्णु भगवाना।
सत्य सनातन सब सुखखाना॥
धारण रूप अनंत तुम्हारा।
पाले सृष्टि सकल संसार॥

क्षीर सागर में शयन तुम्हारा।
पद्मनाभ जटिल रूप तुम्हारा॥
धरम स्थापना के हेतु भवानी।
अवतार धरा भुवन कल्याणी॥

कश्यप अदिति सुत बनिकै आए।
देवकी सुत का रूप धराए॥
नरसिंह बन हिरण्यकश्यप मारा।
हर लीला जग को सुखकारा॥

पयोदधि मथ कर अमृत लाए।
सुर की रक्षा असुर भगाए॥
धनुषधारी बन परशुरामा।
पापी क्षत्रिय किए अखामा॥

राम रूप वनचर बने दयाला।
रावण संहारक बनिकै रखवाला॥
कृष्ण रूप रास रचि आए।
अर्जुन के सारथी बनिकै गाए॥

मत्स्य अवतार बनिकै सुखकारी।
धरते मीन रूप तिमि तारणहारी॥
कच्छप रूप धर धरा को उठाए।
अमृत पाने देव मदद कराए॥

वराह रूप धर हिरण्याक्ष मारा।
धरा सुधारण सुख सवारा॥
वामन रूप बलि से त्रिभुवन लीन।
अद्भुत रूप हरि दिखलाए भीन॥

दधिचि के हड्डी से अस्त्र बनाए।
त्रिपुर भंजन असुरों को भगाए॥
धारी रूप मोहिनी हरि प्यारे।
अमृत सुरों को दान तुम्हारे॥

लक्ष्मी संग सदा सुखदायी।
सबके संकट दूर भगाई॥
धरम धर्म के तुम हो रक्षक।
कष्टों के हरते तुम हो भक्षक॥

तुम हो पालनकर्ता प्यारे।
त्रिभुवन वंदित रूप तुम्हारे॥
जो भी शरण में तेरी आए।
हर विपदा सुख-समृद्धि पाए॥

दीन दुखी की मदद करोगे।
भक्त वत्सल सब संकट हरोगे॥
जो भी विष्णु चालीसा गावे।
जनम-मरण के कष्ट मिटावे॥

जय जगतारन, जय दीनदयाला।
भवसागर से तारो नाथ कृपाला॥
कर जोड़ विनती हम तुम्हसे।
शरण तुम्हारी धरें हर्षित मन से॥

दोहा
जो यह विष्णु चालीसा, भक्ति भाव से गाए।
अक्षय पुण्य हरि कृपा से, वह सुख-संपत्ति पाए॥


 

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